महल दर महल बनाना।
एक समय की बात है।राजू अपना पढ़ाई विदेश में कर रहा था।विदेश में बहुत दिन रहने के कारण स्वदेशी सभ्यता भूल चुका था।राजू शहर के सबसे मशहूर बिजनेसमैन सिंघानिया का बेटा था।एक दिन अचानक सिंघानिया का तबीयत खराब हो गया।सिंघानिया अपने बेटा को फोन किया और स्वदेश लौटने को बोला।राजू भी तुरण स्वदेश का फ्लाइट पकड़ लिया।राजू घर आकर पिताजी के पास पहुंचा। सिंघानिया राजू को तीन मंत्र बताए। 1) महल दर महल बनाना। 2)दरवाजे पर हाथी बांधना 3)अगर समझ में नहीं आए तो तीन पैर के आदमी से पूछना। इतना कहते ही सिंघानिया का प्राण शरीर छोर दिया। सिंघानिया का क्रिया -क्रम हुआ।तब उनका बेटा, पिताजी के इच्छा को पूरा करने में जुट गया। कुछ कारखाने बेचकर, महल दर महल बनाया। जो बचा हुआ कारखाना था ,बेचकर हाथी खरीद लाए। कुछ दिन बीतने के बाद सारा रकम खत्म हो गया। राजू को खाने का भी लाले पड़ने लगे। अब राजू निकाला तीन पैर के आदमी के खोज में। चारों तरफ खोजा, कहीं नहीं तीन पैर का आदमी मिला। राजू काफी पदेशन था। मन को हल्का करने के लिए वह सड़क पर टहल रहा था।तभी वहां से एक बुजुर्ग व्यक्ति हाथ में लाठी लेकर गुजर रहे थे।राजू का न...
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